"वो मेरी सब सुनता है ! "
सूर्योदय से रात को कमरे की बत्ती गुल होने तक
वो मेरी सब सुनता है
उसका भोला चेहरा देख मेरी सुबह हो जाती है
और वही मेरी शुभ -रात्रि है
उसकी आँखें मेरी आँखों के हर इशारे को जानती हैं
वो बोलता कुछ नहीं पर उसकी साँसे मेरा हर अहसास पहचानती हैं
मेरे जाते क़दमों को वो आशा भरी खामोश निगाहों से देखता है
मेरे आते क़दमों की आहट सुन उसकी बांछें खिल जाती हैं
घडी दीवार पर पूरा दिन टिक- टिक करती है
पर मुझे सही समय का आभास वही दिलाता है
मेरे हर सुख -दुःख का वो साथी है
मेरे हर आंसू और मुस्कान का वो सांझी है
सोना -चॉंदी , गाडी़ -बंग्ला नहीं , मेरी मांग है
वो ही बस एक ईश्वर का मुझे वरदान है
उसका और मेरा अजीब किस्सा है
वो मेरा कोख जाया नहीं ,
फिर भी मेरी ज़िन्दगी का वो पूरा हिस्सा है
पूरी गली में वो मेरी पहचान है
जी हाँ सब कहते हैं में उसकी "माँ " और वो मेरा बेटा है
शुक्रगुज़ार हूँ ईश्वर की कि उसे मेरे घर भेजा है
हर जनम में उसका और मेरा अटूट नाता है
मेरा गुस्सा , मेरी डांट को वो ख़ामोशी से सुनता है
फिर भी अपनी वफादारी को वो शतप्रतिशत निभाता है
सोनू , राजू, मिट्ठू और बाबूजी, की पुकार
पर वो दौड़ा दौड़ा आता है
लोट लोट कर अपनी ख़ुशी का इज़हार वो करता है
चार पैर , एक पूँछ , सुनहरा रंग और दरवेश सी उसकी सूरत है
वो कोई और नहीं मेरा अपना " स्कॉच " है
वो मेरी सब सुनता है
जो कहती हूँ वो भी और जो मैं नहीं कहती वो भी
जी हाँ "स्कॉच "मेरी सब सुनता है
Wow...Superb...So true
ReplyDeleteVery aptly framed your emotions into words. Loved reading this ❣
ReplyDeleteThank you ji
DeleteAnother excellent read
ReplyDeleteHoping u take this on in major way
Thank you ji. Very kind of you to say that.
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