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Musafirnaama

कल मुँह- अँधेरे ज़िन्दगी से मुलाकात हो गयी ,
पूरा दिन रोटी का जुगाड़ करते -करते पता ही नहीं चला कब रात हो गयी ,
रात के लिए छत की तलाश सेक्टर 17, ISBT, के वेटिंग रूम में आ कर तमाम हो गयी ,
हमारी ज़िन्दगी की जद्दो -जहद कुछ इस तरह सरे आम हो गयी ।

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