कल मुँह- अँधेरे ज़िन्दगी से मुलाकात हो गयी , पूरा दिन रोटी का जुगाड़ करते -करते पता ही नहीं चला कब रात हो गयी , रात के लिए छत की तलाश सेक्टर 17, ISBT, के वेटिंग रूम में आ कर तमाम हो गयी , हमारी ...
"वो मेरी सब सुनता है ! " सूर्योदय से रात को कमरे की बत्ती गुल होने तक वो मेरी सब सुनता है उसका भोला चेहरा देख मेरी सुबह हो जाती है और वही मेरी शुभ -रात्रि है उसकी आँखें मेरी आँखों ...